क्या आप जानते हैं कि बिना सोचे-समझे किसी भी मंत्र का जाप करना आपकी साधना के लिए नुकसानदायक हो सकता है? इसलिए यह जानना जरूरी है कि आपको किस देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए और किस मंत्र का जाप करना चाहिए।
यदि आपने किसी गुरु से दीक्षा ली है और गुरु ने आपको कोई मंत्र दिया है, तो आप गुरु के निर्देशानुसार उस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
लेकिन यदि आप बिना गुरु दीक्षा के मंत्र जाप करना चाहते हैं, तो किसी भी मंत्र का चुनाव बिना सोचे-समझे नहीं करना चाहिए। मंत्र का चुनाव अपनी प्रकृति और तत्व के अनुकूल करना महत्वपूर्ण है।
मेरी साधना पद्धति के अनुसार, बिना गुरु दीक्षा के मंत्र जाप करने के लिए अपने नाम, नाम राशि या नाम के पहले वर्ण से संबंधित देवी-देवता के मंत्र का चुनाव करना चाहिए।
इसके पीछे नाम और तत्व का सिद्धांत है। प्रत्येक व्यक्ति के नाम के अनुसार उसमें एक विशेष तत्व की वृद्धि मानी जाती है। इसी प्रकार, देवी-देवताओं के मंत्रों का भी अपना विशिष्ट तत्व होता है।
जब आप अपने नाम से संबंधित तत्व के अनुरूप देवी-देवता के मंत्र का जाप करते हैं, तो दोनों के तत्व में अनुकूलता बनी रहती है। इसलिए अपनी साधना के लिए मंत्र चुनते समय नाम और उससे संबंधित तत्व को समझना आवश्यक है।
याद रखिए, केवल किसी देवी-देवता के प्रति श्रद्धा होने से ही उनके प्रत्येक मंत्र का चुनाव उचित नहीं हो जाता। मंत्र का चुनाव भी साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसलिए, प्रश्न केवल यह नहीं है कि आप किस भगवान की पूजा करते हैं, बल्कि यह भी है कि आप किस तत्व से संबंधित हैं और अपनी साधना के लिए उसी तत्व के देवी-देवता के मंत्र का चुनाव करते हैं।
यदि आप अपने नाम के अनुसार देवी-देवता और मंत्र का चुनाव समझना चाहते हैं, तो उचित आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करें।
अक्षर मन्त्र तन्त्र यन्त्र