मन्त्र का अपना कोई अर्थ नहीं होता? मन्त्र जाप से पहले यह समझिए!
क्या आप भी किसी मन्त्र का जाप इसलिए कर रहे हैं क्योंकि किसी ने आपको बताया है कि इस मन्त्र से आपकी इच्छा पूरी हो जाएगी? तो एक बार रुकिए और इस बात को समझिए।
मेरा मानना है कि मन्त्र का अपना कोई निश्चित अर्थ नहीं होता। किसी मन्त्र का अर्थ इस बात पर निर्भर करता है कि साधक उसे किस दृष्टि से समझता है।
इसे एक उदाहरण से समझिए।
मराठी भाषा में ‘आई’ शब्द का अर्थ माँ होता है। लेकिन किसी ऐसे अंग्रेज़ व्यक्ति को, जिसे मराठी भाषा नहीं आती, यही शब्द सुनाई दे, तो सम्भव है कि उसके लिए इसका कोई अर्थ ही न हो।
अर्थात् मन्त्र के अक्षर और उनकी ध्वनि एक हो सकती है, लेकिन उन अक्षरों का अर्थ समझने का दृष्टिकोण हर व्यक्ति का अलग हो सकता है।
अब यही बात मन्त्र पर लागू करके देखिए।
हम किसी मन्त्र का जाप तो शुरू कर देते हैं, लेकिन क्या हम जानते हैं कि उस मन्त्र का हमारे लिए वास्तविक अर्थ क्या है? हम उस मन्त्र के माध्यम से क्या समझना चाहते हैं और हमारा लक्ष्य क्या है?
मेरे विचार से मन्त्र जाप शुरू करने से पहले इन प्रश्नों का उत्तर जानना बहुत जरूरी है।
जब तक साधक मन्त्र का सही अर्थ नहीं समझेगा, तब तक वह यह कैसे तय करेगा कि वह किस उद्देश्य से मन्त्र जाप कर रहा है?
यहाँ सही अर्थ से मेरा तात्पर्य केवल किसी पुस्तक में लिखे शब्दार्थ से नहीं है, बल्कि उस मन्त्र को अपने लक्ष्य से जोड़कर समझने से है।
इसलिए मन्त्र जाप शुरू करने से पहले दो बातें निश्चित कीजिए।
पहली, उस मन्त्र का अर्थ आपके लिए क्या है।
दूसरी, आप उस मन्त्र के माध्यम से क्या प्राप्त करना चाहते हैं।
जब ये दोनों बातें स्पष्ट होंगी, तभी आप अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्टता के साथ साधना शुरू कर पाएँगे।
अन्यथा, बिना अर्थ और लक्ष्य को समझे मन्त्र जाप करते रहना आपके समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं होगा।
इसलिए अगली बार किसी मन्त्र का जाप शुरू करने से पहले केवल यह मत पूछिए कि यह कौन-सा मन्त्र है। यह भी पूछिए कि इस मन्त्र का अर्थ क्या है और मेरा लक्ष्य क्या है?
क्योंकि किसी भी साधना की शुरुआत सही समझ से होनी चाहिए।