ध्यान करने का सबसे सही समय कौन-सा है?
अगर आपसे पूछा जाए कि ध्यान करने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है, तो शायद आपका जवाब होगा—सुबह!
लेकिन क्या वास्तव में सुबह का समय ही ध्यान के लिए सबसे अच्छा है?
मेरे अनुसार, ध्यान के लिए सबसे अच्छा समय रात में सोने से पहले का है—विशेषकर रात 10 बजे के बाद और 2 बजे से पहले।
क्यों?
जैसे-जैसे रात बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे वातावरण शांत होता जाता है। लोगों की आवाजाही कम होती है, कामकाज की हलचल रुकने लगती है और बाहरी शोर भी कम हो जाता है।
जब बाहर की हलचल कम होती है, तो मन को भी भीतर की ओर जाने का अवसर अधिक मिलता है। इसलिए रात का ध्यान अपेक्षाकृत अधिक गहरा हो सकता है।
अब सोचिए, ध्यान करने के बाद अगर आप सो जाएं तो क्या होगा?
ध्यान के कारण मन पहले से शांत होता है। उसी शांत अवस्था में जब नींद आती है, तो नींद भी अधिक सहज और गहरी हो सकती है।
और यहां एक और संभावना है।
अगर ध्यान के बाद आने वाली नींद भी उसी शांत चेतना के साथ जुड़ जाए, तो ध्यान का अनुभव केवल कुछ मिनटों तक सीमित न रहकर नींद तक आगे बढ़ सकता है।
इसके विपरीत सुबह का समय देखिए।
सुबह उठते ही हमारे सामने पूरे दिन की योजनाएं और जिम्मेदारियां होती हैं। क्या काम करना है, कहां जाना है, किससे मिलना है—मन धीरे-धीरे इन्हीं बातों में लग जाता है।
यानी सुबह ध्यान करने के बाद हमारी ऊर्जा फिर पूरे दिन की गतिविधियों और योजनाओं में लग जाती है।
रात में ऐसा नहीं है।
ध्यान के बाद आपको कहीं जाना नहीं है, किसी काम की तैयारी नहीं करनी है और किसी जिम्मेदारी में तुरंत नहीं उतरना है।
आप ध्यान से सीधे विश्राम और नींद की ओर जा सकते हैं।
इसलिए मेरे अनुसार ध्यान का सबसे सही समय वह है, जब ध्यान के बाद मन को तुरंत फिर से दुनिया की भागदौड़ में नहीं उतरना पड़े।
रात का शांत वातावरण → गहरा ध्यान → शांत मन → नींद।
यही क्रम रात के ध्यान को विशेष बना सकता है।
ध्यान के लिए केवल समय महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन अगर आपके पास विकल्प हो, तो एक बार रात में सोने से पहले ध्यान करके देखिए।
हो सकता है, आपको समझ आए कि ध्यान केवल जागते हुए करने की चीज नहीं है—सही अवस्था में आपकी नींद भी उस अनुभव को आगे बढ़ा सकती है।
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