क्या आप जानते हैं कि मन्त्र साधना में छह प्रकार के कर्म बताए गए हैं, जिन्हें षट्कर्म कहते हैं? ये हैं—पुष्टि, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण।
अलग-अलग शास्त्रों में इनकी साधना के समय अलग-अलग बताए गए हैं। इन्हें सरलता से समझने के लिए 24 घंटे को छह बराबर भागों में बाँटकर हर कर्म के लिए चार घंटे का समय निर्धारित किया जा सकता है।
पहला है पुष्टि कर्म। इसका समय सुबह 2 से 6 बजे तक माना जाएगा। पुष्टि का उद्देश्य वृद्धि, पोषण और समृद्धि से जुड़ा है।
दूसरा है वशीकरण। इसका समय सुबह 6 से 10 बजे तक होगा। यह किसी को अपने प्रभाव में लाने से सम्बन्धित कर्म है।
तीसरा है स्तम्भन। इसका समय सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक होगा। इसका सम्बन्ध किसी क्रिया या गति को रोकने से है।
चौथा है विद्वेषण। इसका समय दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक होगा। यह दो पक्षों के बीच वैमनस्य उत्पन्न करने से सम्बन्धित कर्म है।
पाँचवाँ है उच्चाटन। इसका समय शाम 6 से रात 10 बजे तक होगा। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को किसी स्थान या परिस्थिति से विमुख करना बताया गया है।
छठा है मारण। इसका समय रात 10 बजे से 2 बजे तक होगा। यह शत्रु के विनाश से सम्बन्धित कर्म है।
यह समय-विभाजन मेरा सुझाया हुआ एक सरल तरीका है। इसे सभी तान्त्रिक ग्रन्थों का सर्वमान्य नियम नहीं समझना चाहिए।
अब बात करते हैं साधना के समय की। मेरे व्यक्तिगत अनुभव में रात 10 बजे से 2 बजे तक का समय दैनिक मन्त्र साधना के लिए अच्छा रहता है। मैं स्वयं भी इसी समय अपनी नियमित साधना करता हूँ। हालाँकि, हर व्यक्ति की दिनचर्या और साधना की परम्परा अलग हो सकती है।
शान्ति कर्म के लिए किसी विशेष मुहूर्त की प्रतीक्षा करना भी आवश्यक नहीं है। जब मन में शान्ति की भावना हो, तब शान्ति के लिए मन्त्र जप किया जा सकता है।
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अक्षर मन्त्र तन्त्र यन्त्र
9213816442
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